एंटीना से लेकर लॉन्च पैड तक: रॉकेट बनाने में क्या लगता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि एक विशाल रॉकेट जो आकाश को चीरते हुए अंतरिक्ष में जाता है, उसे बनाने में क्या लगता है? यह केवल धातु के टुकड़ों को जोड़ने से कहीं ज़्यादा है; यह इंजीनियरिंग, भौतिकी, और अथक समर्पण का एक जटिल संगम है। यह लेख आपको रॉकेट के निर्माण की रोमांचक यात्रा पर ले जाएगा, एंटीना जैसे छोटे घटक से लेकर उस अंतिम क्षण तक, जब वह लॉन्च पैड से उड़ान भरता है।

🛠️ डिज़ाइन और योजना: नीव डालना

किसी भी रॉकेट का निर्माण डिज़ाइन और योजना से शुरू होता है। यह चरण तय करता है कि रॉकेट क्या करेगा, वह कितना ऊँचा जाएगा, और वह कितना पेलोड (Payload) ले जा सकता है।

  • मिशन की परिभाषा: सबसे पहले यह तय किया जाता है कि रॉकेट का उद्देश्य क्या है—क्या यह संचार उपग्रह (Communication Satellite) ले जाएगा, वैज्ञानिक उपकरण (Scientific Instruments), या अंतरिक्ष यात्रियों को?
  • संरचनात्मक डिज़ाइन: रॉकेट को उड़ान के दौरान होने वाले भारी दबाव और तापमान को सहने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इसमें हवाई-गतिकी (Aerodynamics) का अध्ययन शामिल है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रॉकेट कुशलता से वायुमंडल से गुज़र सके।
  • घटक चयन: प्रोपेलेंट (Propellant), इंजन, नेविगेशन सिस्टम (Navigation System), और संचार एंटीना (Antennae) जैसे महत्वपूर्ण घटकों का सावधानीपूर्वक चयन और डिज़ाइन किया जाता है।

🔥 प्रोपल्शन सिस्टम: रॉकेट का दिल

रॉकेट का इंजन (Engine) या प्रोपल्शन सिस्टम उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यह उसे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बचने के लिए आवश्यक थ्रस्ट (Thrust) प्रदान करता है।

ईंधन (Propellant): रॉकेट ईंधन दो प्रकार का होता है:

  • ठोस ईंधन (Solid Fuel): यह आसानी से संग्रहित होता है, लेकिन एक बार जलना शुरू होने पर इसे नियंत्रित करना कठिन होता है।
  • तरल ईंधन (Liquid Fuel): इसे शुरू और बंद किया जा सकता है, और इसके थ्रस्ट को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें आमतौर पर ऑक्सीडाइज़र (Oxidizer) और ईंधन को मिलाया जाता है।

थ्रस्ट चैंबर और नोजल: थ्रस्ट चैंबर (Thrust Chamber) वह जगह है जहाँ ईंधन जलता है, और नोजल (Nozzle) जलती हुई गैसों को उच्च वेग से बाहर निकालता है, जिससे रॉकेट आगे बढ़ता है।

🧠 एवियोनिक्स और नियंत्रण: रॉकेट का मस्तिष्क

एक रॉकेट को सही दिशा में रखने और पेलोड को इच्छित कक्षा में स्थापित करने के लिए एक परिष्कृत एवियोनिक्स (Avionics) प्रणाली की आवश्यकता होती है।

  • नेविगेशन: जड़त्वीय मापन इकाइयाँ (IMUs) और जीपीएस रिसीवर (GPS Receivers) रॉकेट की स्थिति, गति और अभिविन्यास को ट्रैक करते हैं।
  • मार्गदर्शन (Guidance): एक ऑनबोर्ड कंप्यूटर लगातार उड़ान पथ की गणना करता है और आवश्यकतानुसार सुधार करता है।
  • संचार (Telemetry): एंटीना (Antennae) रॉकेट और पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन (Ground Station) के बीच डेटा और कमांड का आदान-प्रदान करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि मिशन कंट्रोल को रॉकेट के स्वास्थ्य और प्रदर्शन के बारे में पता चलता रहे।

🏗️ निर्माण और एकीकरण: घटकों को एक साथ लाना

डिज़ाइन पूरा होने के बाद, निर्माण शुरू होता है। इस चरण में उच्च-सटीकता, एयरोस्पेस-ग्रेड सामग्री का उपयोग किया जाता है।

  • स्टेज निर्माण: अधिकांश बड़े रॉकेट कई चरणों (Stages) में बने होते हैं। प्रत्येक चरण को एक निश्चित ऊँचाई तक पहुँचने के बाद अलग होने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • टेस्टिंग: प्रत्येक महत्वपूर्ण घटक, विशेष रूप से इंजन, को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने के लिए कठोरता से परीक्षण किया जाता है। शेक और वाइब्रेशन टेस्ट यह सुनिश्चित करते हैं कि रॉकेट लॉन्च के तनाव को सह सके।
  • अंतिम एकीकरण: सभी चरणों, पेलोड, और फेयरिंग (Fairing—पेलोड को ढकने वाला सुरक्षात्मक आवरण) को लॉन्च से पहले वर्टिकल असेंबली बिल्डिंग (VAB) में जोड़ा जाता है।

🎯 लॉन्च पैड पर: अंतिम क्षण

अंतिम असेंबली के बाद, रॉकेट को विशेष वाहनों का उपयोग करके लॉन्च पैड (Launch Pad) तक ले जाया जाता है।

  • ईंधन भरना: रॉकेट के टैंकरों में प्रोपेलेंट और ऑक्सीडाइज़र भरा जाता है। यह एक खतरनाक और समय लेने वाला ऑपरेशन है।
  • चेकआउट: लॉन्च से कुछ घंटे पहले, सभी प्रणालियों की अंतिम जाँच की जाती है, जिसे 'काउंटडाउन' कहा जाता है।
  • लिफ्टऑफ: जब सभी पैरामीटर सही होते हैं, तो इंजन प्रज्वलित होते हैं, और रॉकेट अपने गंतव्य की ओर अपनी उड़ान शुरू करता है।

✅ निष्कर्ष

एक रॉकेट का निर्माण मानवीय सरलता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण है। एंटीना के छोटे तार से लेकर लॉन्च पैड की विशाल संरचना तक, प्रत्येक हिस्सा सावधानीपूर्वक नियोजित और निष्पादित किया जाता है। यह एक सामूहिक प्रयास है जो हमें सितारों तक पहुँचने में सक्षम बनाता है।

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