नैनो सैटेलाइट्स: अंतरिक्ष की नई लहर और छात्र इसमें कैसे हिस्सा ले सकते हैं
🛰️ नैनो सैटेलाइट्स: अंतरिक्ष की नई लहर और छात्र इसमें कैसे हिस्सा ले सकते हैं
क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला उपग्रह (Satellite) छोटा भी हो सकता है? पारंपरिक बड़े उपग्रहों के विपरीत, नैनो सैटेलाइट्स (Nano Satellites) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। ये न केवल सस्ते हैं, बल्कि इन्हें बनाना और लॉन्च करना भी अपेक्षाकृत आसान है।
नैनो सैटेलाइट्स क्या होते हैं?
नैनो सैटेलाइट्स, जिन्हें कभी-कभी "क्यूबसैट्स" (CubeSats) भी कहा जाता है, बहुत छोटे उपग्रह होते हैं। इनका वर्गीकरण इनके द्रव्यमान (Mass) के आधार पर किया जाता है:
- द्रव्यमान: नैनो सैटेलाइट्स का वजन आमतौर पर 1 किलोग्राम से 10 किलोग्राम के बीच होता है।
- आकार: सबसे आम नैनो सैटेलाइट, क्यूबसैट, एक मानक इकाई ($1\text{U}$) के रूप में शुरू होता है, जिसका आकार लगभग $10 \text{cm} \times 10 \text{cm} \times 10 \text{cm}$ होता है। बड़े नैनो सैटेलाइट्स $2\text{U}$, $3\text{U}$, $6\text{U}$, या यहाँ तक कि $12\text{U}$ आकार के हो सकते हैं।
- कार्य: छोटे होने के बावजूद, ये पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation), रेडियो संचार, वैज्ञानिक प्रयोग और प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं।
- लाभ: इन्हें कम लागत, तेज़ विकास चक्र और बड़े लॉन्च वाहनों पर "राइड-शेयरिंग" के माध्यम से आसान लॉन्च के लिए जाना जाता है।
🚀 छात्र नैनो सैटेलाइट्स कैसे बना सकते हैं?
नैनो सैटेलाइट्स का उदय छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण को सुलभ बना रहा है। छात्र कई चरणों में इस रोमांचक क्षेत्र में भाग ले सकते हैं:
1. सैटेलाइट मिशन का उद्देश्य और डिज़ाइन
सबसे पहले, टीम को यह तय करना होगा कि उपग्रह क्या करेगा। क्या यह एक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा, कोई तस्वीर लेगा, या एक संचार रिले के रूप में कार्य करेगा?
- उद्देश्य निर्धारण: एक स्पष्ट, प्राप्त करने योग्य मिशन निर्धारित करें (उदाहरण के लिए: वायुमंडल में एक निश्चित गैस को मापना)।
- प्रणाली डिजाइन: एक मिशन प्रोफाइल बनाएं, जिसमें आवश्यक सभी घटक शामिल हों: पेलोड (Payload), पावर सिस्टम (Power System), ऑन-बोर्ड कंप्यूटर (OBC), संचार प्रणाली (Communication System) और रवैया नियंत्रण प्रणाली (Attitude Control System)।
- क्यूबसैट मानक: डिज़ाइन को अंतर्राष्ट्रीय क्यूबसैट मानक (CubeSat Standard) का पालन करना चाहिए ताकि यह लॉन्च वेंडर के साथ संगत हो।
2. तकनीकी ज्ञान और टीम निर्माण
सैटेलाइट बनाना एक टीम प्रयास है जिसमें कई विषयों के ज्ञान की आवश्यकता होती है:
- टीम बनाएं: इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर), विज्ञान (भौतिकी, खगोल विज्ञान), और परियोजना प्रबंधन के छात्रों की एक बहु-विषयक टीम (Multi-disciplinary Team) बनाएं।
- कम्पोनेंट सोर्सिंग: आवश्यक कॉमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ (COTS) घटकों को खरीदने की योजना बनाएं, क्योंकि ये कम लागत पर उपलब्ध होते हैं।
- सॉफ्टवेयर विकास: एम्बेडेड सिस्टम प्रोग्रामिंग (जैसे Arduino या Rasberry Pi आधारित सिस्टम) का उपयोग करके ऑन-बोर्ड कंप्यूटर के लिए कोड लिखें।
3. निर्माण और परीक्षण (Building and Testing)
यह वह चरण है जहाँ सैटेलाइट को भौतिक रूप दिया जाता है।
- असेंबली: घटकों को ध्यान से क्यूबसैट फ्रेम (Structure) में असेंबल करें। यह एक साफ़ कमरे (Clean Room) या नियंत्रित वातावरण में किया जाना चाहिए ताकि दूषित पदार्थों से बचा जा सके।
- व्यापक परीक्षण: यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपग्रह कठोर अंतरिक्ष वातावरण में जीवित रहेगा और कार्य करेगा, कई परीक्षण महत्वपूर्ण हैं:
- वाइब्रेशन टेस्ट: यह अनुकरण करने के लिए कि यह रॉकेट लॉन्च के दौरान कैसे कंपन करेगा।
- थर्मल वैक्यूम टेस्ट: अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान और वैक्यूम का अनुकरण करने के लिए।
- फंक्शनल टेस्ट: यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी सबसिस्टम (Subsystems) एक साथ काम कर रहे हैं।
4. लाइसेंस और लॉन्च की तैयारी
सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए कानूनी और लॉजिस्टिकल चरण आवश्यक हैं:
- रेडियो लाइसेंस: संचार के लिए उपयुक्त आवृत्ति स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय नियामक निकाय (भारत में, आमतौर पर WPC) से लाइसेंस प्राप्त करें।
- लॉन्च वेंडर: इसरो (ISRO) या अंतरराष्ट्रीय प्रदाताओं जैसे लॉन्च सेवा प्रदाताओं (Launch Service Providers) के साथ अनुबंध करें। पॉड (Deployer) में उपग्रह को सुरक्षित करने के लिए लॉन्च प्रदाता की आवश्यकताओं का पालन करें।
- ग्राउंड स्टेशन: उपग्रह से डेटा प्राप्त करने और कमांड भेजने के लिए एक ग्राउंड स्टेशन (एंटीना और रिसीवर) स्थापित करें।
✨ निष्कर्ष: अंतरिक्ष सबके लिए
नैनो सैटेलाइट्स ने अंतरिक्ष को केवल बड़ी सरकारी एजेंसियों या कंपनियों तक सीमित नहीं रखा है; अब यह विश्वविद्यालयों और उत्साही छात्र टीमों के लिए भी एक रोमांचक क्षेत्र है। यह एक अमूल्य सीखने का अनुभव प्रदान करता है जो छात्रों को वास्तविक दुनिया की इंजीनियरिंग चुनौतियों का समाधान करने, टीम वर्क कौशल विकसित करने और अंततः, ब्रह्मांड में अपना निशान छोड़ने में मदद करता है।
क्या आप अपने कॉलेज में अंतरिक्ष की इस नई क्रांति का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं?



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें