GPS कैसे काम करता है और NavIC क्यों है भारत के लिए ज़रूरी?
आज की दुनिया में, हम दिशा-निर्देश प्राप्त करने, कैब बुक करने या अपने प्रियजनों को ट्रैक करने के लिए अक्सर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) पर निर्भर रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तकनीक वास्तव में कैसे काम करती है? और भारत अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम, NavIC, क्यों बना रहा है? आइए जानते हैं।
GPS की कार्यप्रणाली: एक त्रिकोणीय समन्वय (Triangulation)
GPS एक अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो अमेरिका की सरकार के स्वामित्व में है और अमेरिकी वायु सेना द्वारा संचालित है।
GPS मुख्यतः तीन खंडों से मिलकर काम करता है:
- अंतरिक्ष खंड (Space Segment): इसमें पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 24 से 32 उपग्रहों का एक समूह शामिल है।
- नियंत्रण खंड (Control Segment): इसमें दुनिया भर के निगरानी स्टेशन शामिल हैं जो उपग्रहों को ट्रैक करते हैं और उनके सटीक स्थान को अपडेट करते हैं।
- उपयोगकर्ता खंड (User Segment): इसमें आपके स्मार्टफोन, कार नेविगेटर और अन्य रिसीवर जैसे डिवाइस शामिल हैं।
यह काम कैसे करता है?
आपके डिवाइस को अपना स्थान जानने के लिए, उसे कम से कम चार GPS उपग्रहों से सिग्नल प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
दूरी की गणना: प्रत्येक उपग्रह एक सिग्नल भेजता है जिसमें उस समय की जानकारी होती है जब सिग्नल भेजा गया था। आपका GPS रिसीवर सिग्नल को प्राप्त करने में लगे समय को मापता है और इसे प्रकाश की गति से गुणा करके उपग्रह से अपनी दूरी की गणना करता है।
त्रिकोणीय समन्वय (Triangulation):
- एक उपग्रह आपकी संभावित स्थिति को एक गोले (Sphere) पर सीमित करता है।
- दूसरे उपग्रह से दूरी की गणना करने पर, आपकी स्थिति दो गोलों के प्रतिच्छेदन (Intersection) से बनी एक घेरे (Circle) पर सीमित हो जाती है।
- तीसरे उपग्रह से दूरी की गणना करने पर, यह दो बिंदुओं तक सीमित हो जाती है।
- चौथा उपग्रह या पृथ्वी की सतह यह निर्धारित करने में मदद करता है कि कौन सा बिंदु वास्तविक है।
यह प्रक्रिया आपको पृथ्वी पर लगभग किसी भी स्थान पर सटीक अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई प्रदान करती है।
🇮🇳 NavIC: भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम
NavIC का मतलब है Navigation with Indian Constellation। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) है।
NavIC क्यों है भारत के लिए ज़रूरी?
- रणनीतिक स्वतंत्रता (Strategic Autonomy): GPS अमेरिकी सेना द्वारा नियंत्रित है और संकट या युद्ध की स्थिति में इसे बंद किया जा सकता है, जैसा कि कारगिल युद्ध के समय हुआ था। NavIC से भारत की नेविगेशन सेवा पर किसी बाहरी सत्ता का नियंत्रण नहीं होगा।
- सटीकता और कवरेज (Accuracy and Coverage): NavIC भारत और लगभग 1500 किमी के आसपास के क्षेत्र में अत्यधिक सटीकता प्रदान करता है।
- सैन्य और नागरिक अनुप्रयोग (Military & Civilian Applications):
- मानक स्थिति सेवा (SPS): सभी नागरिकों के लिए।
- प्रतिबंधित सेवा (RS): केवल अधिकृत सैन्य उपयोग के लिए।
- आपदा प्रबंधन और इन्फ्रास्ट्रक्चर: वाहन ट्रैकिंग, आपदा प्रबंधन, सटीक समय निर्धारण और भू-डेटा कैप्चर में उपयोगी।
निष्कर्ष
GPS ने विश्व स्तर पर क्रांति ला दी है, लेकिन NavIC भारत के लिए केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं; यह संप्रभुता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे अधिक डिवाइस NavIC को अपनाएंगे, भारत में अधिक सटीक और विश्वसनीय नेविगेशन सेवाओं की उम्मीद की जा सकती है।
क्या आप अपने फ़ोन पर NavIC का उपयोग करने के लिए उत्साहित हैं? नीचे कमेंट करें!



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें