पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन (RLV) क्या है? ISRO की 'Space Plane' तकनीक
पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन (RLV) क्या है? ISRO की 'Space Plane' तकनीक
अंतरिक्ष अन्वेषण हमेशा से ही एक महंगा काम रहा है। पारंपरिक रॉकेट एक बार उपयोग के बाद नष्ट हो जाते हैं, जिससे हर नए मिशन के लिए एक नया, महंगा रॉकेट बनाना पड़ता है। कल्पना कीजिए कि हर उड़ान के बाद आपको एक नया हवाई जहाज खरीदना पड़े!
इसी चुनौती का समाधान है पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन (Reusable Launch Vehicle - RLV)। ये ऐसे रॉकेट या अंतरिक्ष यान होते हैं जिनके हिस्से, जैसे बूस्टर या स्वयं यान, पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से वापस लौट आते हैं और मरम्मत (refurbishment) के बाद उन्हें फिर से उपयोग किया जा सकता है।
RLV का महत्व
RLV तकनीक अंतरिक्ष अभियानों की लागत को नाटकीय रूप से कम करने की क्षमता रखती है। वर्तमान में, लॉन्च की लागत का एक बड़ा हिस्सा रॉकेट के निर्माण में जाता है। घटकों के पुन: उपयोग से प्रति प्रक्षेपण लागत में 80% तक की कमी आ सकती है, जिससे अंतरिक्ष पहुंच सस्ती, विश्वसनीय और मांग पर उपलब्ध हो सकेगी।
ISRO का 'पुष्पक' - भारत का स्पेस प्लेन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस तकनीक में महारत हासिल करने के लिए पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन-प्रौद्योगिकी प्रदर्शक (RLV-Technology Demonstrator - RLV-TD) कार्यक्रम शुरू किया है। इस परियोजना का अंतिम लक्ष्य एक टू स्टेज टू ऑर्बिट (TSTO) पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान विकसित करना है, जिसका पहला चरण पुन: प्रयोज्य होगा और दूसरे चरण में एक स्पेस प्लेन होगा।
RLV-TD को 'पुष्पक' नाम दिया गया है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान राम के पौराणिक विमान का नाम है।
पुष्पक की विशेषताएं और मिशन
RLV-TD, 'पुष्पक', एक पंखयुक्त (winged) वाहन है जो एक विमान (aircraft) जैसा दिखता है। यह कई जटिल प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करने के लिए एक उड़ान परीक्षण मंच (flying test bed) के रूप में कार्य करता है, जिनमें शामिल हैं:
- हाइपरसोनिक उड़ान (Hypersonic Flight - HEX): ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक (Mach 5+) गति से उड़ान भरने की तकनीक का परीक्षण।
- स्वायत्त लैंडिंग (Autonomous Landing - LEX): अंतरिक्ष से वापस आने के बाद, मानव नियंत्रण के बिना, हवाई पट्टी पर अपने आप सटीक लैंडिंग करने की क्षमता। ISRO ने RLV LEX-01, LEX-02, और LEX-03 जैसे सफल मिशनों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण क्षमता को सिद्ध किया है।
- स्क्रैमजेट प्रोपल्शन एक्सपेरिमेंट (SPEX): वायु-श्वसन इंजन (air-breathing engine) का उपयोग करके उड़ान भरने की क्षमता।
RLV-TD को भविष्य में भारत के पूर्ण पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन का पहला चरण बनने के लिए बढ़ाया (scaled up) जाएगा, जो उपग्रहों और कार्गो को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम होगा।
LEX मिशन की सफलता
हाल के RLV LEX मिशनों में, पुष्पक को एक हेलीकॉप्टर द्वारा 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया और फिर छोड़ा गया। इसके बाद, इसने अपने एकीकृत नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करते हुए, एक अंतरिक्ष वाहन के पुनः प्रवेश की स्थितियों का अनुकरण करते हुए, सफलतापूर्वक स्वायत्त लैंडिंग पूरी की। इस सफलता ने ISRO को दुनिया के उन चुनिंदा अंतरिक्ष संगठनों की कतार में खड़ा कर दिया है जो स्पेस प्लेन की इस जटिल तकनीक में महारत हासिल कर चुके हैं।
RLV तकनीक का सफल विकास भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो अंतरिक्ष तक पहुंच को क्रांतिकारी बनाने और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का वादा करता है।



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